डायरी

DIARY

स्मृतियाँ मेघों के घर की

20 अक्तूबर, शिलांग

आज होटल पहुँचकर अच्छा लगा। टैक्सी ड्राइवर के कारण सफ़र बहुत रोचक हो गया। हरी-भरी घुमावदारपहाड़ियों से टैक्सी आगे बढ़ रही थी कि ड्राइवर बोला - बिटिया, आप पहली बार आई हैं? और इसके उत्तर के बाद सारा रास्ता वह बोलता रहा और हम सुनते रहे। यहाँ के लोगों की विचारधारा जानकर हम सब बहुत हैरान हुए। लोग आज भी मानते हैं कि शिलांग पीक पर शिलांग देवता रहते हैं। पहले सोपेन बेंग के पहाड़ से अाकाश तक एक लता थी और इसी के सहारे देवता धरती पर उतरते थे। एक ईर्ष्यालु देवता ने वह लता काट दी। जो देवता यहाँ रह गए, उन्हीं से मानव जाति बढ़ी। शिलांग देवता की पुत्री की संतानें ही खासी जाति की मुखिया बनीं। ड्राइवर की बातें सुनकर बच्चे मुँह दबा-दबाकर हँसते रहे। पर न जाने साठ-सत्तर किलोमीटर का रास्ता कब पार हो गया, पता ही नहीं चला।

21 अक्तूबर

आज दिन के लगभग बारह बजे तक आसमान मेघों से घिरा था। तेज़, ठंडी हवाएँ चल रही थीं। होटल की खिड़की से बाहर का दृश्य अत्यंत आकर्षक लग रहा था। चीड़ के वृक्षों की कतारें तथा हरी मखमली हरियाली-बिछी पहाड़ियाँ - हम इनका आनंद ले ही रहे थे कि तभी गाइड आ गया। उसने बताया कि चार सौ किलोमीटर लंबाई तथा अस्सी किलोमीटर चौड़ाई का यह क्षेत्र नदियों और पहाड़ियों का इलाका है। मौसमी हवाओं के कारण मेघों को अधिक समय तक यहाँ निवास करना पड़ता है इसी कारण यह प्रदेश मेघालय कहलाता है।

हम सब गाइड के साथ चेरापूंजी के लिए निकल पड़े। रास्ते में देवदार, बाँस के पेड़ और तरह-तरह की वनस्पतियाँ देखने को मिलीं। कई बार तो हमने सड़क पर रेंगते हुए साँप देखे। साँपों को इस तरह घूमते देख हम डर गए। कहीं किसी ने काट लिया तो! पर गाइड के समझाने पर कि जब तक इन्हें छेड़ो नहीं या हानि न पहुँचाओ, ये किसी को नहीं काटते। इससे कुछ मन को तसल्ली हुई।

चेरापूंजी सर्वाधिक वर्षा के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। सोचा था, चेरापूंजी में खूब बारिश हो रही होगी पर वहाँ पहुँचकर अलग ही अनुभव हुआ। आश्चर्य की बात यह है कि ग्रीष्म काल में पानी की तलाश के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता है। चेरापूंजी से लगभग तीन किलोमीटर दूर, 'कालिकाई' प्रपात देखा। लोककथा के अनुसार यह प्रपात 'कालिकाई' नामक स्त्री के आँसू हैं जिसने यहाँ प्राण त्यागे थे। पर्वतीय वातावरण ने यहाँ के लोगों के रहन-सहन को विशिष्ट रूप दे दिया है। उन्होंने स्वयं को वातावरण के अनुरूप ढाल लिया है। वे परिश्रमी, प्रकृति-प्रेमी और सरल स्वभाव के हैं। हरे-भरे घास के मैदान, पहाड़ी नदियाँ और झरने इस इलाके की शोभा हैं। अभी तक वे आँखों के सामने हैं।

साभार : गुंजन